लखनऊ से 145 किमी दूर इस गांव में बृजेश के बाद 2 और केस पॉजिटिव आए हैं। खतरे की घंटी बज चुकी है, शहरों के बाद अब गांवों में भी इस वायरस ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। 20 अप्रैल को पीसावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम लोगों का टेस्ट करने के लिए गांव पहुंची। लगभग 500 की आबादी वाले इस गांव में कुल 152 लोगों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 40 लोग पॉजिटिव पाए गए। इनमें से 7 लोग 60 साल से अधिक उम्र के थे। इन 40 मरीजों में दो स्वास्थ्य कार्यकर्ता, एक डॉक्टर और एक लैब तकनीशियन भी शामिल हैं।

ग्रामीण इलाकों में अब तेजी से बढ़ रहे केस:- 

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, 20 अप्रैल को जिले में 2,985 कुल सक्रिय मामलों के साथ 384 नए कोरोना मामले दर्ज किए गए। इससे पांच दिन पहले 15 अप्रैल को जिले में 307 नए केस और 1,681 सक्रिय मामले दर्ज किए गए थे। इस बीच 11 अप्रैल को जिले में केवल 71 नए केस आए और 714 सक्रिय मामले दर्ज किए गए थे।


शाहजहांपुर जिले में कोविड नियंत्रण सेंटर के प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया कि दो से तीन दिन पहले तक जहां 250 से 300 केस आते थे, वहीं कल (22 अप्रैल) बीते चौबीस घंटे में 600 केस दर्ज हुए। महामारी शुरू होने के बाद से अब तक जिले में कोरोना से 145 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि 23 अप्रैल को कोरोना के 232 केस दर्ज किए गए। मिर्जापुर जिले के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, तीन दिन पहले 20 अप्रैल को 312 कोरोना के नए मामले सामने आए। महामारी की शुरुआत के बाद से अब तकजिले में 6,298 कोरोना के मामले आए और 50 मौतें हो चुकी हैं।

15 अप्रैल को बृजेश कुमार अवस्थी (22) अपनी तबीयत को लेकर असहज थे। जुकाम-खांसी के अलावा उन्हें बुखार भी था। बृजेश अपने घर से करीब 7 किमी दूर पिसावां में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचे और अपना कोरोना टेस्ट कराया। उनका डर तब सच में बदल गया, जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई।


सीतापुर जिले के बरखेरवा गांव के रहने वाले बृजेश कुमार अवस्थी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "मुझे 14 दिनों के लिए होम क्वारंटाइन रहने के लिए कहा गया और कुछ दवाएं लिखी गईं, जो केंद्र में नहीं थीं। लिहाजा अगले दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम घर पर आई और दवा दे गई।" बृजेश के अलावा उनके घरवालों ने भी टेस्ट कराए थे, जो निगेटिव आए।


लखनऊ से 145 किमी दूर इस गांव में बृजेश के बाद 2 और केस पॉजिटिव आए हैं। खतरे की घंटी बज चुकी है, शहरों के बाद अब गांवों में भी इस वायरस ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। 20 अप्रैल को पीसावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम लोगों का टेस्ट करने के लिए गांव पहुंची। लगभग 500 की आबादी वाले इस गांव में कुल 152 लोगों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 40 लोग पॉजिटिव पाए गए। इनमें से 7 लोग 60 साल से अधिक उम्र के थे। इन 40 मरीजों में दो स्वास्थ्य कार्यकर्ता, एक डॉक्टर और एक लैब तकनीशियन भी शामिल हैं।


पीसावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी आनंद यादव ने गाँव कनेक्शन को बताया, "बरखेरवा गांव की मुख्य सड़क पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। पॉजिटिव मिले 7 लोग जो 60 साल से ऊपर हैं उन्हें जल्द अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। बाकी बचे पॉजिटिव मरीजों को होम आइसोलेशन की सलाह दी गई है। साथ ही गांव और जांच की जा रही है।"


बरखेरवा के हालात देखकर ग्रामीण भारत की स्वास्थ्य सेवाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। जन स्वास्थ्य अभियान के योगेश जैन ने गाँव कनेक्शन को बताया, "देश में जो कुछ भी सामने आ रहा है वो चिंता का प्रमुख कारण है।" उन्होंने आगे कहा, "गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं की पहले से ही कमी है, ऐसे में वहां कोरोना के केस बढ़े तो महामारी से जूझना मुश्किल होगा।"