एक बार फिर बदलते हुए मौसम को लेेकर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। जैसा कि पिछले एक-दो दिन से देश के कई स्थानों पर मौसम में परिवर्तन हुआ है मौसम विभाग ने कई स्थानों पर तेज आंधी एवं गरज चमक के साथ बौछारें गिरने की संभावना भी व्यक्त की है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए मौसम को लेकर किसानों के लिए समसामयिक सलाह जारी की है ताकि संभावित हानि से बचा जा सके। बता दें कि इस समय उत्तरी भारत के कई राज्यों में रबी फसल की कटाई चल रही है। ऐसे में प्रतिकूल मौसम की संभावना को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों के लिए सलाह दी है।

जानें, अभी के मौसम को लेकर किसान भाई क्या करें और क्या नहीं, और क्या बरते सावधानी?

एक बार फिर बदलते हुए मौसम को लेेकर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। जैसा कि पिछले एक-दो दिन से देश के कई स्थानों पर मौसम में परिवर्तन हुआ है मौसम विभाग ने कई स्थानों पर तेज आंधी एवं गरज चमक के साथ बौछारें गिरने की संभावना भी व्यक्त की है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए मौसम को लेकर किसानों के लिए समसामयिक सलाह जारी की है ताकि संभावित हानि से बचा जा सके। बता दें कि इस समय उत्तरी भारत के कई राज्यों में रबी फसल की कटाई चल रही है। ऐसे में प्रतिकूल मौसम की संभावना को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों के लिए सलाह दी है।


अभी एक-दो दिन नहीं करें गेहूं की कटाई:-

किसान आने वाले दिनों में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने एवं हल्की वर्षा होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए गेहूं फसल की कटाई का कार्य 1-2 दिनों तक न करें, कटाई से पूर्व अपने जिले के मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी लेते रहें। किसान कटी हुई फसलों को बांधकर रखे अन्यथा तेज हवा या आंधी से फसल एक खेत से दूसरे खेत में जा सकती है। गहाई के उपरांत भंडारण से पूर्व दानों को अच्छी तरह से सुखा दें। किसान कटाई के बाद फसल अवशेषों को खेत में न जलाएं।


मक्का की फसल में दें नत्रजन की तीसरी मात्रा:-

किसान मक्का की फसल दो अवस्था में है। एक नरमंजरी अवस्था तथा दूसरा घुटने की ऊंचाई। इस अवस्था में किसान मक्का फसल की नरमंजरी अवस्था में होने पर नत्रजन की तीसरी मात्रा का छिडकाव करे। जबकि मक्के की ऊंचाई घुटने की अवस्था तक आ गई हो उन खेतों में निंदाई-गुडाई करने के उपरांत नत्रजन की शेष मात्रा का आधा हिस्सा डाल कर मिट्टी चढ़ाने के बाद सिंचाई करें। किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि आने वाले दिनों में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने एवं हल्की वर्षा होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए मक्का की फसल में तना छेदक का प्रकोप बढ़ सकता है। इसलिए इसकी लगतार निगरानी करते रहे।


मूंग एवं उड़द में थिर्प्स कीट की जांच करें उपचार:-

किसान ग्रीष्म कालीन फसल जैसे मूंग एवं उड़द अभी तक नहीं लगाई गई है तो खेत की जुताई कर बुवाई करें। इस समय मूंग के उन्नत बीजों (पूसा विशाल, पूसा 672, पूसा 9351, पंजाब 668)की बुवाई कर सकते हैं। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना जरूरी है। बुवाई से पूर्व बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम तथा फॉस्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से अवश्य उपचार करें। समय पर बोई गई मूंग एवं उड़द फसल वानस्पतिक अवस्था में होने पर बदली वाले मौसम आने पर थिर्प्स कीट की उपस्थित की जांच करें व प्रकोप होने पर इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर दिन में छिडकाव करें।


धान में कांसे निकलने की अवस्था में करें नत्रजन का छिडक़ाव:-

ग्रीष्म कालीन धान ग्रीष्मकालीन धान में अभी कांसे निकलने की अवस्था है। जिन खेतों में ग्रीष्मकालीन धान कन्से निकलने की अवस्था में आ गई हो वहन नत्रजन के छिडकाव की सलाह दी जाती हैद्ध किसान भाइयों को सलाह है कि ग्रीष्म कालीन धान की फसल को बचाने हेतु प्रारंभिक नियंत्रण के लिए प्रकाश प्रपंच अथवा फिरोमेन ट्रेप का उपयोग करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए फरटेरा (रायनेक्सीपार) 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या करटाप, 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करें।


भंडारण अनाज को भंडारण में रखने से पहले भंडार घर की सफाई करें तथा अनाज को सुखा लें। दानों में नमी 12 प्रतिशत से ज्यादा नही होनी चाहिए। भंडारघर को अच्छे से साफ कर लें। छत या दीवारों पर यदि दरारें है तो इन्हे भरकर ठीक कर लें। बोरियों को 5 प्रतिशत नीम तेल के घोल से उपचारित करें। बोरियों को धूप में सुखाकर रखें। जिससे कीटों के अंडे तथा लार्वा तथा अन्य बीमारियां आदि नष्ट हो जाएं। किसानों को सलाह है की कटी हुई फसलों तथा अनाजों को सुरक्षित स्थान पर रखे। रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतों की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडों के अंडे तथा घास के बीज नष्ट हो जाएंगे।


सब्जियों में करें ये काम:-

  1. किसान वर्तमान तापमान फ्रेंच बीन, सब्जी लोबिया, चौलई, भिंडी, लौकी, खीरा, तुरई आदि तथा गर्मी के मौसम वाली मूली की सीधी बुवाई हेतु अनुकूल है क्योंकि, बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त हैं। 
  2. बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है। 
  3. उन्नत किस्म के बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से लेकर बुवाई करें। 
  4. बेल वाली फसलों की मचान / सहारे को ठीक करें तथा कुंदरू एवं परवल में उर्वरक दें। इस मौसम में बेलवाली सब्जियों और पछेती मटर में चूर्णिल आसिता रोग के प्रकोप की संभावना रहती है। यदि रोग के लक्षण अधिक दिखाई दे तो कार्बंन्डिज्म 1 ग्राम/लीटर पानी दर से छिडक़ाव मौसम साफ होने पर करें। 
  5. फरवरी में बुवाई की गई फसलें जैसे भिंडी, बरबटी, ग्वारफली इत्यादि में गुडाई कर सिंचाई करें।
  6. इस मौसम में भिंडी की फसल में माईट कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर इथेयॉन दर 5-2 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिडक़ाव मौसम साफ होने पर करें। 
  7. प्याज की फसल में इस अवस्था में उर्वरक न दे अन्यथा फसल की वनस्पति भाग की अधिक वृद्धि होगी और प्याज की गांठ की कम वृद्धि होगी। 
  8. बैंगन तथा टमाटर की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इक्ट्ठा कर नष्ट कर दें। साथ ही कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश दर 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं।