प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा की राज्य सरकारें, केंद्र द्वारा प्रस्तावित मॉडल को अपनाये जिससे किसान की आय में बढ़ोतरी होगी। दिल्ली में कृषी उन्नति मेले में किसानों और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री ने कहा, "कृषि बाजार में सुधार पर सरकार का सारा ध्यान है और सरकार किसानों के लिए स्थानीय बाजारों से वैश्विक बाजारों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।"


"हम यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं कि किसानों को उनकी फसल के लिए बेहतर कीमत मिले और बजट में हमने घोषणा की है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किए जाएंगे जो की किसानों द्वारा वहन कि गई लागत पर 50% बढाकर दिया जायेगा"।


उन्होंने कहा कि विपक्ष ने नए MSP नीति पर किसानों को भ्रमित करने और बढ़काने की कोशिश की है, लेकिन सरकार लागत की गणना एक तरह से करेगी, जिसमें किराए और परिवार के श्रम, सिंचाई, इनपुट, लागत पर ब्याज, किसानों द्वारा भू-राजस्व का भुगतान शामिल होगा।



खेती में चुनौतियों के बावजूद, केंद्र ने 2022 तक खेती की आय को दुगना करने का लक्ष्य रखा है और सरकार ने मिट्टी के स्वास्थ्य कार्ड को उपलब्ध कराने और उत्पादन बढ़ाने के लिए यूरिया के 100% नीम कोटिंग को लागू करने जैसे कदमों के माध्यम से प्रगति की है।



मोदी ने अपने भाषण में फसल बीमा और सिंचाई जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया है जो किसानों के जीवन में फायदा पहुंचा रहे हैं, और बागवानी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किए जाने वाले 'ऑपरेशन ग्रीन' पर भी प्रकाश डाला। इस दौरान, प्रधान मंत्री ने जैविक पदार्थों के लिए एक नया इलेक्ट्रॉनिक मार्केटिंग मंच भी लॉन्च किया।



"किसानों को मधुमक्खी पालन जैसे नए तरीकों को अपनाने की जरूरत है, सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करें और कृषि कचरे से धन बनाने की आवश्यकता है", प्रधान मंत्री ने कहा।


प्रधान मंत्री मोदी ने किसानों से अधिक बांस और खाद्य तेल बीजों के विकास के लिए आग्रह किया, जिन पर भारत भारी आयात पर निर्भर है, और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के लिए यूरिया जैसे भारी उर्वरकों का इस्तेमाल को आधे करने की सलाह दी ।


इस अवसर पर कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि कई किसान जो राजनीति में शामिल हो गए हैं, और जो किसानों के मुद्दों को उठा रहे हैं, उन्हें भी किसानों को उपयोगी सरकारी योजनाओं से अवगत करना चाहिए।


प्रधान मंत्री मोदी और कृषि मंत्री का बयान पिछले साल जून से निरंतर किसानों के विरोध की पृष्ठभूमि में आता है। पूरे देश में किसान मूल्यवान और लोन माफी की मांग कर रहे हैं, लगातार फसल बर्बाद होने से कमोडिटी की कीमतों में तेज गिरावट आई जिससे कि किसान आय में कमी आई।


बस देखना यह होगा क्या यह जो प्रधान मंत्री जी ने कहा है वो चुनाव से पहले होगा या बाद में , और लागत का मूल्यांकन किस तरह होगा ??