घरेलू सब्जियों के बीज उद्योग को वर्तमान से लगभग दोगुना होने की संभावना है। संकर बीजों के अधिक उपयोग से प्रेरित होकर अगले पांच वर्षों में उत्पादन लगभग 8,000 करोड़ होने की सम्भवना जताई जा रही हैं।


आईसीआरए के एसोसिएट हेड और एवीपी - कॉर्पोरेट रेंटिंग्स, श्री सचिन सचदेवा का कहना है, "विविध आहार आवश्यकताओं और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लोगो ने सब्जी को बढ़ावा दिया हैं । अगले पांच वर्षों में भारत मैं सब्जियों के उत्पादन में लगभग 35% की वृद्धि की आवश्यकता होगी। हालांकि, खेती के क्षेत्र में वृद्धि करने की बाधाओं को देखते हुए, उत्पादकता बढ़ाने के माध्यम से विकास बढ़ेगा जिसमें सब्जी फसलों की खेती में हाइब्रिड के बीज को अपनाने से एक बड़ा हिस्सा संचालित करना होगा। आईसीआरए का अनुमान है कि मात्रा के साथ-साथ मूल्य (संकरण के पीछे) में वृद्धि के साथ, सब्जियों के बीज उद्योग का आकार मौजूदा स्तर से दोगुना लगभग 8,000 करोड़ रुपये होगा। "


पिछले दो-डेढ़ दशकों में, भारत में सब्जियों की फसलें तीन गुना ज्यादा बढ़ गयी हैं , जो कि वित्त वर्ष -2012 में 59 मिलियन टन से बढ़कर अनुमानित 181 मिलियन टन हो गई। इस विकास में खेती के क्षेत्र में वृद्धि और पैदावार में सुधार दोनों के द्वारा योगदान दिया गया है। केंद्र और राज्य स्तर पर सरकार ने सब्जी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। हालांकि, लगातार सुधार के बावजूद, देश में अधिकांश सब्जी फसलों की पैदावार अन्य देशों के मुकाबले कम हैं और यहां तक ​​कि विश्व औसत से भी नीचे है।


सामान्य पोषण संबंधी दिशानिर्देशों के मुकाबले प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति 110 किलोग्राम सब्जियों की खपत की आवश्कयता होती हैं । देश में उत्पादन प्रति व्यक्ति स्तर लगभग 140 किलो प्रति वर्ष के स्तर पर पर्याप्त है। हालांकि, विभिन्न स्तरों पर कुप्रबंधन के कारण आबादी की आवश्यक पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सब्जियों की एक सापेक्ष कमी भी है। उत्पादन की अंतर्निहित खराब होने की वजह से, लगभग 30% सब्जियां कटाई, भंडारण, ग्रेडिंग, परिवहन, पैकेजिंग और वितरण के दौरान नष्ट होती हैं।


श्री सचदेव ने निष्कर्ष निकाला: "सब्जी के उत्पादन में हाइब्रिड बीजों को अपना लेने से सुधार संभव हे । देश में विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों के कारण नई स्थान-विशिष्ट उच्च उपज देने वाली हाइब्रिड किस्मों को विकसित किया जाना चाहिए। संकर बीज अनुसंधान और विकास में निवेश एक महत्वपूर्ण तत्व है और इसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए। "