सरकार ने सरसों का समर्थन मूल्य 4 हजार रुपए घोषित किया था लेकिन नरवाना में किसानो को 3200 से 3400 रुपए के बीच सरसों को बेचना पड़ रहा हैं। एक तरफ सरकार बजट में किसानों को लागत का डेढ़ गुणा देने की बात कहती है।


यह है हाल जौ का ,श्री गंगानगर मंडी राजस्थान में कल एक किसान ने अपनी श्रेष्ठ क्वालिटी की 112 क्विंटल जौ सिर्फ Rs 1125/क्विंटल के भाव बेची, जबकि सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य/MSP 1410/क्विंटल है।

प्रति क्विंटल घाटा = 285//क्विंटल

112 क्विंटल जौ की बिक्री पर इस किसान की कुल लूट: Rs 31,920



वहीं दूसरी तरफ जींद की एक भी मंडी में सरकार की कोई सरकारी खरीद नहीं है। सरकार किसानों की फसल को व्यापारियों के हवाले छोड़कर किसानों की फसल को लूट रही है। सरकार किसान योजनाओं के नाम पर किसानों को गुमराह करने का काम कर रही है। किसानो ने कहा की अगर सरकार सरसों की खरीद नहीं करती है तो किसानो द्वारा नरवाना में सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया जाएगा।


अब तक मंडी में 12 हजार 305 क्विंटल सरसों की फसल आ चुकी हैं


इन दिनों मंडी में सरसों की बंपर फसल पहुंच रही है। मार्केट कमेटी में दर्ज आंकड़ों के अनुसार बीते साल की अपेक्षा अब तक 6 गुना तक सरसों की फसल मंडी पहुंची है। बीते साल अब तक दो हजार 98 क्विंटल सरसों की फसल आई थी। इस साल 12 हजार 305 क्विंटल फसल आ चुकी है। किसानों ने सरकारी खरीद शुरू करवाने की मांग केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के साथ-साथ जिला प्रशासन से की है।


सरकार द्वारा सरसों की सरकारी रेट चार हजार रुपए प्रति क्विंटल तक किया हुआ है। इन दिनों किसानों को 3600 रुपए प्रति क्विंटल तक के भाव मिल रहे है। सरकार के अनुसार सरसो की खरीद प्रदेश के 11 जिलों में 15 मार्च से शुरू होनी थी। पर अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ हैं। अगर सरकार अपना काम समय पर शुरू करती तो किसान अपनी फसल कम भाव मैं बेचने को मजबूर न होता । बीते साल से काफी अधिक गुना फसल मंडी मैं आ चुकी है। सरसों की आवक इस बार अच्छी है। यहां पर किसानों को सरसों का सरकारी भाव से कम खुली बोली पर मिल रहा है।


हरियाणा सरकार ने सरसों की न्यूनतम औसत कीमत (एमएसपी) 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तय की थी और साथ मैं 100 रुपये का बोनस भी देने की बात कही थी । हैफेड के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने इसकी जानकारी दी थी कि वह केंद्र की मूल्य सहायता योजना (पीएसएस) के तहत एनएफ़ईडी की तरफ से एमएसपी पर सरसों के बीज की खरीद करेंगे । उन्होंने कहा था की योजना के तहत, हेफ़ेड, अपने सदस्य सहकारी मार्केटिंग सोसायटी की दुकानों के माध्यम से सीधे किसानों से सरसों के बीज खरीद लेगा। किसानों को भुगतान बैंकों के आरटीजीएस के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जाना था।


कृषिमंत्री को भेजा पत्र

धानमंडी में सरसों की सरकारी खरीद करवाने की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ ने कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी को एक पत्र लिखकर किसानों को जल्द राहत दिलवाने की मांग की है। वहीं जल्द ही सरकारी खरीद शुरू न होने पर पर आंदोलन की चेतावनी दी हैं । किसान सरसों की फसल धानमंडी में ला रहे है पर खरीद शुरू नहीं होने के चलते किसानों को अपनी फसलों को औने पौने दाम में बेचना पड़ रहा है।