डीजल वाहनों पर प्रतिबंध के विरोध में हजारों ट्रैक्टर-ड्राइविंग किसानों ने सड़कों को रोक दिया और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिला मजिस्ट्रेटों के कार्यालयों को घेर लिया। एक परेशान किसान ने कहा की "हम हर 10 साल में एक नया ट्रैक्टर नहीं खरीद सकते।"


किसानों ने कहा की केंद्र सरकार की " किसान विरोधी नीतियों" के चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा हैं।


गाजियाबाद में, 192 गांवों के किसान के प्रतिनिधियों ने जिला मजिस्ट्रेट रितु माहेश्वरी से मुलाकात की, जिन्होंने किसानो को आश्वासन दिया कि उनकी मांग सरकार के समक्ष रखी जाएगी।

क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के मुताबिक, इस प्रतिबंध से गाजियाबाद के किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहे है । कृषि वर्ग के तहत पंजीकृत लगभग 13,000 ट्रैक्टरों में से 70% 10 वर्ष से अधिक हो चुके हैं।


भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि हम राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के खिलाफ नहीं हैं (जिस पर प्रतिबंध लगाया गया है) और हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। । हमारा विरोध सरकार के खिलाफ है, जिसने स्वच्छ अभियान के लिए फण्ड दिया हैं पर बेचारे किसानो के लिए कुछ नहीं किया। उनकी मांग हे की किसानो को ट्रेक्टर देने के लिए सरकार एक फण्ड बनाये। जो किसान 5000 का बैंक कर्ज नहीं चूका प् रहा हे वह ऐसी महंगाई मैं नया ट्रेक्टर लेने के बारे मैं सोच भी नहीं सकता। किसानों का कल्याण हर राजनीतिक दल के सर्वेक्षण एजेंडे के प्रमुख आधार पर है, जबकि जमीनी स्तर पर सरकार की नीतियां उन्हें मार रही हैं। "


विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और मेरठ, बिजनौर, शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत में बड़े पैमाने पर जाम लग गया।

एक किसान ने कहा की , "यह सरकार इतनी बेरहम कैसे हो सकती है? हम किसान हैं जो 125 करोड़ भारतीयों को भोजन करते हैं। हमारे जीवन और कृषि पद्धतियों को बेहतर बनाने के बजाय, यह सरकार हमें प्राचीन युग में वापस धकेल रही है, जब खेतों की जुताई के लिए बैलों का इस्तेमाल किया जाता था। "


शामली में एक किसान ने पूछा की , "क्या वे यह भी जानते हैं कि ट्रैक्टर का अर्थ किसी किसान के लिए क्या है?" "हम 25 से अधिक वर्षों तक मशीनरी का इस्तेमाल करते हैं और यहां वे 10 वर्षों में इसे छीनना चाहते हैं। एक दशक में, एक किसान वाहन खरीदने के लिए जो ऋण लेता है, उसे पूरा करने में जब तक सक्षम होता हैं तब तक कोई सरकारी आदेश आ जाता हैं और बेचारा किसान अपने लिए कुछ कमा नहीं पाता। "


पश्चिम यूपी के लिए बीकेयू के मीडिया समन्वयक धर्मेंद्र मलिक ने कहा, "हर 10 साल में ट्रैक्टर को बदलना मजाक से कम नहीं हैं । अगर सरकार प्रदूषण के बारे में चिंतित है, तो सरकार किसानो को नए ट्रेक्टर देने की योजना पहले बनाये बाद मैं वाहनों पर प्रतिबन्ध लगाए । गन्ने की बकाया राशि लंबित रहें या बिजली के टैरिफ में बढ़ोतरी हो, बीजेपी शासन मैं किसानो का बुरा हाल हैं। "