मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने विधान सभा को बताया की किसानो पर 17,000 करोड़ बिजली का बिल बकाया है । जो किसान खेतों मैं पंप इस्तेमाल कर रहे हैं उन पर पावर बिल बकाया हैं और उन्होंने अभी तक इसका भुगतान नहीं किया हैं । इस तरह महाराष्ट्र सरकार के खजाने पर अधिक भर पड़ा हैं ।


फडनवीस ने यह भी कहा कि सरकार ने लंबित बकाया राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। पर किसानो की समस्याओं को देखते हुए इस अभियान को अस्थायी तौर पर रोक दिया है ताकि किसानों द्वारा विभिन्न कठिनाइयों लको हल करने की और ध्यान दिया जा सके।


"राज्य सरकार ने एमईआरसी (महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग) को किसानों से राशि की वसूली के लिए निर्देश दिया था और प्रक्रिया शुरू हो गई थी, हालांकि, किसानों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए, वसूली प्रक्रिया रोक दी गई है," मुख्यमंत्री ने कहा।


फडनवीस, एनसीपी नेता अजित पवार के आरोपों का जवाब दे रहे थे कि किसानों के बिजली कनेक्शन काट दिया जा रहा है और सरकार किसानों से "अन्याय" कर रही है जो बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर पाए हैं।


उन्होंने मांग की कि विद्युत कनेक्शन को डिस्कनेक्ट करने की प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए।


एनसीपी नेता अजित पवार ने मांग की कि विद्युत कनेक्शन को डिस्कनेक्ट करने की प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए।


आपको बता दे की हाल ही मैं एक आरटीआई मैं खुलासा हुआ की महाराष्ट्र सरकार सिर्फ चाय मैं 577 % की वृद्धि कर चुकी हैं। सरकार ने इस पर बयान दिया की पैसा सिर्फ चाय पर खर्च नहीं किया गया था, इसमें और भी चीजे शामिल हैं। इस लागत में कैबिनेट के दौरान चाय, स्नैक्स और दोपहर के भोजन पर खर्च किए गए धन शामिल हैं, जिसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रतिनिधिमंडलों और अन्य सरकारों के प्रतिनिधियों सहित सीएमओ के मेहमान आवास पर प्रशासनिक बैठकें शामिल हैं।


इस बात को सरकार भी मानती हैं ये की ये जानकारी सही हैं। किसान मेहनत मजदूरी करके दो वक़्त की रोटी का इंतजाम भी नहीं कर पा रहा हैं और सरकार उनसे बकाया वसूलने मैं लगी हुई है।