चीन द्वारा अमेरिका से आयातित उत्पादों पर आयात शुल्क लगा देने से अमेरिकन कपास महंगी हो गई है। इसलिए चीन ने हाल में भारत से 2 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास के आयात सौदे किए हैं। वैसे भी विश्व बाजार में भारतीय कपास सबसे सस्ती है इसलिए आगे निर्यात मांग बढ़ने की संभावना है जिससे घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में तेजी आने का अनुमान है।


कॉटन एसोसिएशन आॅफ इंडिया (सीएआई) के अनुसार हाल ही में चीन ने भारत से 2 लाख गांठ कपास के आयात सौदे किए हैं तथा आगामी फसल सीजन में भारत से चीन को 25 से 30 लाख गांठ कपास का निर्यात होने का अनुमान है। पहली अक्टूबर 2017 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2017-18 में चीन द्वारा 8 लाख गांठ कपास के आयात की उम्मीद है।


अप्रैल के आखिर तक 55 लाख गांठ निर्यात होने का अनुमान

कमल कॉटन एंड एसोसिएटस के अध्यक्ष राकेश राठी ने बताया कि अप्रैल के आखिर तक भारत से करीब 55 लाख गांठ कपास का निर्यात हो जायेगा। विश्व बाजार में भारतीय कपास सबसे सस्ती है इसलिए आगे इसके निर्यात सौदों में और तेजी आने का अनुमान है। विश्व बाजार में भारतीय कपास का भाव जहां 81 सेंट प्रति पाउंड है वहीं अन्य देशों से आयातित कपास का भाव 93 सेंट प्रति पाउंड है।


निर्यात बढ़ेगा, आयात घटेगा

सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन 2017-18 में कपास का निर्यात बढ़कर 70 लाख गांठ (एक गांठ -170 किलो) होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका निर्यात केवल 58.20 लाख गांठ का ही हुआ था। चालू फसल सीजन में कपास का आयात घटकर 17 लाख गांठ का ही होने का अनुमान है जबकि पिछले फसल सीजन में इसका आयात 27 लाख गांठ का हुआ था।


उत्पादन 377 लाख गांठ होने का अनुमान

कॉटन एडवाईजरी बोर्ड (सीएबी) के अनुसार चालू फसल सीजन 2017-18 में कपास का उत्पादन 377 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि नई फसल की आवक के समय 47.81 लाख गांठ कपास का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। ऐसे में कुल उपलब्धता 441.81 लाख गांठ की बैठेगी। जब‌कि देश में कपास की सालाना खपत 334 लाख गांठ की होने का अनुमान है।


मंडियों में 262 लाख गांठ की हो चुकी है आवक

महाराष्ट्र की मंडियों में मंगलवार को कपास के भाव 39,000 से 39,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) रहे जबकि प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में दैनिक आवक करीब एक लाख गांठ की हो रही है। चालू फसल सीजन में पहली अक्टूबर 2017 से 27 मार्च 2018 तक उत्पादक मंडियों में 262 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है।