भावांतर भुगतान योजना का श्रेय लेने वाले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में ही यह योजना फेल हो गई है । सिहोर के साथ नरसिंहपुर और अन्य जिलों में टमाटर की कीमतों में आई भारी गिरावट के कारण किसान अपनी फसल को सड़क पर फेकने को मजबूर हो रहे हैं।


राज्य की कई मंडियों में टमाटर के दाम घटकर एक से दो रुपये प्रति किलो रहे गए है जिससे किसानों को लागत तो दूर मंडी आने-जाने का खर्च भी नहीं निकल रहा है। एगमार्क नेट के अनुसार राज्य की हरदा मंडी में शुक्रवार को टमाटर का भाव 2 से 3 रुपये प्रति किलो रह गया जबकि बुरहानपुर मंडी में नीचे में टमाटर 3 रुपये किलो बिका ।


प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में टमाटर के भाव दो रुपए प्रति किलो भी नहीं मिलने से गुस्साए किसानों ने टमाटर वहां सब्जी मंडी में सड़क पर फेंक दिया। किसानों का कहना है कि टमाटर उगाना आजकल नुकसान का धंधा हो गया है, इसलिए इसे सड़क पर बिखेर रहे हैं। किसान


यूनियन संगठन नरसिंहपुर के अध्यक्ष के अनुसार मुनाफा तो दूर की बात है, किसान को टमाटर का उत्पादन करने में जो खर्चा आता है, वह भी नहीं मिल रहा है। राज्य के किसानों की वित्तीय हालात बहुत खराब हो गई है, जबकि राज्य सरकार इसके लिए कुछ नहीं कर रही है। भावांतर भुगतान योजना का लाभ भी टमाटर किसानों को नहीं मिल रहा है।


राष्ष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने बताया कि भावांतर भुगतान योजना से किसानों के बजाए व्यपारियों को ज्यादा फायदा हो रहा है, राज्य सरकार के पास पैसा ही नहीं है जबकि केंद्र सरकार सहयोग नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि टमाटर किसानों को परिवहन लागत भी अपने जेब से देनी पड़ रही है, इसीलिए उन्हें अपनी फसल सड़क पर फेकने को मजबूर होना पड़ रहा है।


दो दिन पहले राज्य के मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर स्थित शाहगंज इलाके में भी टमाटर के भाव दो रुपए प्रति किलोग्राम न मिलने पर किसानों ने कड़ी मेहनत से उगाई गई, उपज को सड़क पर फेंकने के लिए बाध्य होना पड़ा था।