विश्व बाजार में कीमतें उंची होने के कारण जौ के आयात पड़ते के नहीं लग रहे हैं, साथ ही रुपये के मुकाबले डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। वर्तमान में उत्पादक मंडियों में जौ की नई फसल की आवक बनी हुई है लेकिन आगे दैनिक आवक कम हो जायेगी। साथ ही गर्मी बढ़ने पर माल्ट कंपनियों की जौ में मांग बढ़ेगी, जिससे इसकी कीमतों में सुधार आने का अनुमान है।


गुरुग्राम स्थिर इम्पीरियल माल्ट लिमिटेड के डायरेक्टर ने बताया कि यूक्रेन और रूस से आयातित जौ के भाव गुरुग्राम पहुंच 1,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले जा रहे हैं इसलिए कंपनियां आयात नहीं कर रही हैं। उन्होंने बताया कि रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती से आयात और महंगा हो जायेगा। डॉलर की कीमत मंगलवार को 66.40 रुपये हो गई।


उन्होंने बताया कि यूक्रेन और रूस में जून-जुलाई में जौ की नई फसल की आवक बनेगी, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार वहां उत्पादन में कमी आयेगी, इसीलिए वहां के निर्यातक आगे के सौदे नहीं कर रहे हैं। ऐसे में चालू सीजन में जौ का आयात सीमित मात्रा में ही होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पिछले साल इन देशों से करीब 2 लाख टन जौ का आयात हुआ था। माल्ट कंपनियों में जौ की खपत करीब 4.5 से 5 लाख टन की सालाना होती है।


हरियाणा की रेवाड़ी मंडी के जौ कारोबारी राजीव बंसल ने बताया कि उत्पादक मंडियों अभी जौ की आवक अच्छी हो रही है जबकि मई के बाद आवक कम हो जायेगी। आगे जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी जौ में माल्ट कंपनियों की खरीद में भी तेजी आने का अनुमान है जिससे इसके मौजूदा भाव में 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी बन सकती है। हरियाणा की रेवाड़ी मंडी में मंगलवार को जौ का भाव 1,325 से 1,350 रुपये प्रति क्विंटल रहा। गुरुग्राम माल्ट कंपनियों में पहुंच जौ के सौदे 1,475 से 1,525 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटी के अनुसार हो रहे हैं।


कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में जौ का उत्पादन 19.9 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 17.5 लाख टन का हुआ था।