भारत मैं मानसून वर्षा इस साल सामान्य से थोड़ी कम होने की उम्मीद है, जबकि ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी बेल्ट के कुछ हिस्सों में सूखा पड़ सकता है क्योंकि एल नीनो मौसम पैटर्न 2018 की दूसरी छमाही में विकसित हो सकता है, एक निजी यू.एस. स्थित मौसम पूर्वानुमानकर्ता ने कहा।


सूखा प्रभावित अर्जेंटीना को अगले दो हफ्तों में देश के पूर्वी हिस्सों में बारिश होने की उम्मीद है । लेकिन सोयाबीन की फसल को फिर से खत्म करने में देर हो सकती है, रेडियंट सॉल्यूशंस के वरिष्ठ कृषि मौसम विज्ञानी, कैल टापली, पूर्व एमडीए अर्थसाट ने कहा ।


ला नीना कमजोर है और वह तटस्थ मौसम की दिशा में आगे बढ़ रहा हैं, जो कि एलनो द्वारा वर्ष की दूसरी छमाही में सबसे संभावित परिदृश्य के बाद का पालन करने का पूर्वानुमान है। "


एल नीनो मौसम पद्धति एशिया के हिस्सों और दक्षिण अमेरिका में सामान्य वर्षा से शुष्क स्थितियों को लेकर आती है। अन्य पूर्वानुमानियों ने एल नीनो पैटर्न के इस साल देर से आने की आशंका जताई हैं , लेकिन अभी तक कुछ प्रमुख मौसम विज्ञानी इसे एक संभावना से अधिक के रूप में वर्गीकृत कर रहे हैं।


पिछले साल भारत का वार्षिक मानसून मौसम औसत , इसी कारण मध्य और उत्तरी राज्यों मैं कम फसल उगाई जा सकी। भारतीय मानसून की वर्षा, जो जून से सितंबर तक होती हैं। वह इस वर्ष भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 98 प्रतिशत की है जो पिछले साल95 प्रतिशत था।


"इस वर्ष भारत में मानसून सामान्य से कुछ हद तक कमजोर होने की उम्मीद हैं । जिसके कारण सोयाबीन, मूंगफली और कपास का उत्पादन कम हो सकता हैं "। "अगले कुछ महीनों में क्वींसलैंड में कुछ सूखापन संभव है, लेकिन गेहूं की अनुकूल स्थिति होने की संभावना कम् हैं।"


2017 के गर्म और शुष्क मौसम की वजह से ऑस्ट्रेलिया के गेहूं की फसल मैं लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली हैं जो की एक दशक में,अपने सबसे नीचले स्तर पर हैं । अर्जेंटीना मैं अगले दो हफ्तों में अनाज की पट्टी के पूर्वी हिस्से में बारिश का अनुमान है। "मिट्टी की नमी में कुछ सुधार होगा लेकिन सोयाबीन के विकास के चरण को देखते हुए इसमें बहुत देर हो चुकी है।"


इस बात की आशा भी नहीं की सकती की अर्जेंटीना चार महीने के सूखे के बाद सोया के उत्पादन मैं कोई बढ़ोतरी कर सकें ऐसा विश्लेषकों का मानना हैं । इसकी भरपाई के लिए चीन जो सोयाबीन का पहले नंबर का आपूर्तिकर्ता हैं वो इसमें अर्जेंटीना की कुछ मदद करें तोह इसकी भरपाई कुछ हद तक की सकती हैं।


मौसम मैं हो रहे बदलाव के कारण पूर्वानुमानी इस बात के संकेत दे रहे हैं की मध्य नवंबर 2017-18 तक सोयाबीन का उत्पादन कम होने की सम्भावना हैं।